
छपी प्रतिविसेसांक
सिरजण - विसेसांक : अर्जुनदेव चारण अंक 55-56
डॉ. अर्जुनदेव चारण री रचनात्मक दुनिया अर साहित्यिक योगदान नै समर्पित कथेसर रो विशेषांक।
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ओ अंक डिजिटल ई मिलै₹50- अंक
- 55-56
- बगत
- अक्टूबर-मार्च 2026
- पानां
- 120
- रूप
- छपी प्रति · विसेसांक
- भासा
- राजस्थानी
- ISSN
- 2348-9251
- प्रकासण
- अक्टूबर 2025
- संपादक
- रामस्वरूप किसान, डॉ. सत्यनारायण सोनी
सिरजण - विसेसांक : अर्जुनदेव चारण
‘सिरजण’ डॉ. अर्जुनदेव चारण री साहित्यिक रचनाशीलता नै समर्पित विशेष प्रस्तुति है।
अर्जुनदेव चारण री कविता, साहित्यिक दृष्टि अर सृजनशीलता राजस्थानी साहित्य में खास पहचान राखै है। ई विशेषांक पाठकां नै उनरी रचनात्मक दुनिया नै नजदीक सूं जाणण रो अवसर देवै है।
राजस्थानी साहित्य, कविता अर आधुनिक रचनाशीलता में रुचि राखण वाळा पाठकां खातर ई अंक खास संग्रहणीय है।

रामस्वरूप किसान
संपादक
कथेसर रा संपादक। जलम 14 अगस्त 1952। ‘बारीक बात’ सारू साहित्य अकादेमी पुरस्कार (2019) अर ‘राती कणेर’ रै उल्थै सारू साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कार (2003)।
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डॉ. सत्यनारायण सोनी
संपादक
कथेसर रा संपादन सहयोगी। एम.ए. (हिंदी अर राजस्थानी), पीएच.डी. (महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर)। राजस्थानी कहाणीकार।
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