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कथेसर : अंक 11
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- 11
- Period
- अक्टूबर–दिसम्बर 2014
- Format
- Digital
- Language
- Rajasthani
- ISSN
- 2348-9251
- Published
- August 2020
- Editor
- Ramswaroop Kisan, Dr. Satyanarayan Soni
अक्टूबर–दिसम्बर 2014 रै इण अंक में श्यामसुंदर भारती अर राजेन्द्र जोशी री कहाणियां, रस्किन बाण्ड री कहाणी 'बखत बीतण रै साथै' रो उल्थो, राजेन्द्र शर्मा 'मुसाफिर' रो व्यंग्य अर बैजनाथ पंवार नै सरधांजळी है। लोकरंग में साशा ज़िनोव्येवा रो मांगणियार गायकां री गीत परम्परा माथै लेख अर मनुज देपावत रो गीत 'धोरां आळा देस जाग' ई इणमें है।

Ramswaroop Kisan
Editor
कथेसर रा संपादक। जलम 14 अगस्त 1952। ‘बारीक बात’ सारू साहित्य अकादेमी पुरस्कार (2019) अर ‘राती कणेर’ रै उल्थै सारू साहित्य अकादेमी अनुवाद पुरस्कार (2003)।
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Dr. Satyanarayan Soni
Editor
कथेसर रा संपादन सहयोगी। एम.ए. (हिंदी अर राजस्थानी), पीएच.डी. (महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर)। राजस्थानी कहाणीकार।
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- संपादकीय : आज री कहाणीरामस्वरूप किसान5
- पठेसर दीठ7
- संस्कारश्यामसुंदर भारती9
- अबै माफी नींराजेन्द्र जोशी24
- बखत बीतण रै साथैमूळ रस्किन बाण्ड, उल्थो डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी31
- लोकतंतर री धजावांराजेन्द्र शर्मा 'मुसाफिर'36
- जीवण-जूझ रा सिरजक : बैजनाथ पंवारप्रो. भंवरसिंह सामौर40
- मांगणियार गायकां री गीत परम्परा : भावां रो भरावसाशा ज़िनोव्येवा47
- अभनै रा किस्सामोहन आलोक49
- धोरां आळा देस जागमनुज देपावत51
- सिस्टम री बखियां उधेड़ती कहाणियां53
- दलित जीवण री अबखायां नैं चवड़ै करती कहाणियां56
- बाजारवाद रै बरक्स जीवण मूल्य री खोजडॉ. जगदीश गिरी60







